रक्षा बंधन
रक्षा बंधन (Raksha Bandhan) का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है, जो हर साल सावन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है。इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर 'राखी' (रक्षा सूत्र) बांधती हैं, उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई अपनी बहन की जीवनभर रक्षा करने का वचन देते हैं。
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इस प्यारे पर्व के बारे में कुछ मुख्य बातें यहाँ दी गई हैं:
अर्थ: संस्कृत में 'रक्षा बंधन' का अर्थ 'सुरक्षा का बंधन' होता है。यह धागा मात्र एक डोर नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ खड़े रहने का संकल्प है。
पौराणिक कथा: हिंदू धर्म में रक्षा बंधन का इतिहास बहुत पुराना है। कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में द्रौपदी ने भगवान कृष्ण की कलाई पर चोट लगने पर अपनी साड़ी का टुकड़ा बांधा था, जिसके बदले कृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया था。इसी तरह, एक अन्य पौराणिक कथा में माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधकर भगवान विष्णु को वैकुण्ठ वापस ले जाने का वरदान मांगा था。
ऐतिहासिक प्रसंग: मध्यकालीन भारत में, चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजकर रक्षा की गुहार लगाई थी, जिसे हुमायूं ने स्वीकार कर एक भाई का धर्म निभाया था。
इस दिन परिवार के सभी सदस्य मिलकर जश्न मनाते हैं, स्वादिष्ट मिठाइयाँ बाँटते हैं और एक-दूसरे को उपहार देते हैं。त्योहार से जुड़े शुभ मुहूर्त और अन्य रीति-रिवाजों के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप विकिपीडिया के लेख को पढ़ सकते हैं।